Mahabharat EP 3 - पांडव अपनी माता कुंती के साथ पहुँचे वारणाव्रत | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mahabharat EP 3 - पांडव अपनी माता कुंती के साथ पहुँचे वारणाव्रत | महाभारत एक धर्म युद्ध

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Mahabharat EP 3 - पांडव अपनी माता कुंती के साथ पहुँचे वारणाव्रत | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 3
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

महाभारत का यह एपिसोड एक ओर कौरवों के रचे गए मीठे धोखे और दूसरी ओर महात्मा विदुर की उस अपार बुद्धिमत्ता को दर्शाता है जो संकट के समय अपने भतीजों (पांडवों) की ढाल बनती है। दुर्योधन और धृतराष्ट्र के बार-बार आग्रह करने पर, युधिष्ठिर अपनी माता कुंती और चारों भाइयों (भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव) के साथ वारणाव्रत जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। यद्यपि युधिष्ठिर का मन कुछ आशंकित है, परंतु वे अपने तात (धृतराष्ट्र) की आज्ञा का उल्लंघन नहीं करना चाहते। जब पांडव वारणाव्रत के लिए प्रस्थान कर रहे होते हैं, तो हस्तिनापुर की प्रजा अत्यंत भावुक होकर उन्हें विदाई देती है। इसी विदाई के समय एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटना घटती है। महामंत्री विदुर, जो कौरवों की लाक्षागृह वाली साजिश को अपनी गुप्तचर व्यवस्था के माध्यम से जान चुके हैं, पांडवों को बचाने के लिए एक कूटनीतिक चाल चलते हैं। विदाई के समय विदुर युधिष्ठिर को गले लगाते हैं और 'म्लेच्छ भाषा' (एक प्राचीन गुप्त भाषा जिसे केवल विदुर और युधिष्ठिर ही समझ सकते थे) में उन्हें सावधान करते हैं। विदुर युधिष्ठिर से कहते हैं, "जो हथियार लोहे या स्टील का नहीं होता, वह भी शरीर को भस्म कर सकता है (इशारा आग की तरफ)। जो चूहा बिल बनाकर जमीन के नीचे रहता है, वह दावानल (जंगल की आग) से बच जाता है।" युधिष्ठिर विदुर की इस पहेली को तुरंत समझ जाते हैं और उन्हें आश्वस्त करते हैं कि वे सतर्क रहेंगे। दुर्योधन और शकुनि इस गुप्त वार्तालाप को देखकर भी कुछ समझ नहीं पाते। जब पांडव अपनी माता कुंती के साथ वारणाव्रत पहुंचते हैं, तो नगर के लोग उनका अत्यंत भव्य स्वागत करते हैं। पुरोचन, जो दुर्योधन का मोहरा है, उन्हें उस नए बने 'लाक्षागृह' (लाख के महल) में लेकर जाता है। बाहर से यह महल अत्यंत सुंदर, भव्य और सुगंधित प्रतीत होता है। पुरोचन पांडवों की बहुत आवभगत करता है ताकि उनके मन में कोई संदेह न रहे। लेकिन महल में प्रवेश करते ही युधिष्ठिर और भीम को उस महल की दीवारों से आती राल, तेल और लाख की अजीब सी गंध महसूस होने लगती है। युधिष्ठिर को तुरंत विदुर की चेतावनी याद आ जाती है और वे समझ जाते हैं कि यह महल उनके लिए कोई राजमहल नहीं, बल्कि एक मौत का कुआं है। यह एपिसोड एक शांत खौफ और आने वाले भयंकर खतरे की आहट को बहुत ही शानदार तरीके से पेश करता है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 3

Release Year

1988

Mahabharat EP 3 - पांडव अपनी माता कुंती के साथ पहुँचे वारणाव्रत | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

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