
Mahabharat EP 6 - पांडवों के लाक्षागृह में मरने की फैली खबर | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 6 - पांडवों के लाक्षागृह में मरने की फैली खबर | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
बी. आर. चोपड़ा कृत 'महाभारत' (1988) का छठा (6वां) एपिसोड भावनाओं, धोखे और एक राज्य के गहरे शोक को प्रस्तुत करता है। वारणाव्रत के लाक्षागृह (लाख के महल) में लगी वह भयंकर आग शांत हो चुकी है। राख के मलबे में छह जले हुए शव (एक भीलनी और उसके पांच पुत्र) मिलते हैं। कौरवों के गुप्तचर और दुर्योधन के दूत हस्तिनापुर पहुँचकर यह झूठा लेकिन हृदयविदारक समाचार देते हैं कि कुंती और पांचों पांडव उस आग में जलकर भस्म हो गए हैं और किसी का भी शरीर पहचानने लायक नहीं बचा है। यह भयंकर खबर सुनते ही हस्तिनापुर के राजमहल में हाहाकार मच जाता है। इस एपिसोड का सबसे मार्मिक और रुला देने वाला दृश्य पितामह भीष्म का विलाप है। गंगापुत्र भीष्म, जिन्होंने इस कुरुवंश की रक्षा के लिए अपने जीवन के सारे सुख त्याग दिए थे, इस खबर से पूरी तरह टूट जाते हैं। जो भीष्म कभी किसी शत्रु के सामने नहीं झुके, वे आज नियति के सामने घुटने टेक देते हैं। वे फूट-फूट कर रोते हैं और स्वयं को पांडु के पुत्रों की हत्या का जिम्मेदार मानते हैं, क्योंकि वे उनकी रक्षा नहीं कर पाए। भीष्म का वह चीत्कार और उनका एकांत में विलाप किसी भी दर्शक की आंखों को नम कर देता है। दूसरी ओर, महाराज धृतराष्ट्र भी विलाप करते हैं, लेकिन उनके शोक में एक मनोवैज्ञानिक द्वंद्व (conflict) छिपा है। बाहर से वे अपने भतीजों की मृत्यु पर रो रहे हैं, लेकिन उनके मन के किसी गहरे कोने में एक शांति भी है कि अब उनके पुत्र दुर्योधन के राजा बनने के रास्ते का सबसे बड़ा कांटा हमेशा के लिए निकल गया है। दुर्योधन, दुशासन और शकुनि अकेले में अपनी इस 'सफलता' पर ठहाके लगाकर जश्न मनाते हैं। इस बीच, महात्मा विदुर, जो सच जानते हैं, भीष्म के पास जाते हैं लेकिन अभी भी अपना रहस्य छिपाए रखते हैं। उधर, वारणाव्रत से दूर, घने और खौफनाक जंगल के बीच कुंती और पांचों पांडव अपनी जान बचाकर भाग रहे हैं। वे भेष बदलकर गंगा नदी के तट पर पहुँचते हैं। वहां उनकी भेंट महात्मा विदुर द्वारा भेजे गए एक विश्वासपात्र मल्लाह (नाविक) से होती है। वह नाविक उसी 'म्लेच्छ भाषा' (गुप्त भाषा) में युधिष्ठिर से बात करता है, जिससे पांडवों को विश्वास हो जाता है कि वह विदुर का ही आदमी है। वह नाविक उन्हें अपनी नाव में बैठाकर सुरक्षित रूप से नदी के उस पार ले जाता है। पांडव अब अपने राजसी वस्त्र त्याग कर तपस्वियों और ब्राह्मणों का भेष धारण कर लेते हैं, और यहीं से उनके अज्ञात और कठिन जीवन की एक नई शुरुआत होती है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 6
Release Year
1988











