
Mahabharat EP 11 - अर्जुन ने भेदी मछली की आँख | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का ग्यारहवां (11वां) एपिसोड भारतीय इतिहास और महाकाव्य के सबसे भव्य, कौशलपूर्ण और ऐतिहासिक क्षणों में से एक को प्रस्तुत करता है—'अर्जुन द्वारा मत्स्य-भेद और द्रौपदी स्वयंवर की विजय'। पिछले एपिसोड में कर्ण के अपमानित होने और वापस लौटने के बाद, राजा द्रुपद के दरबार में एक अजीब सी निराशा और सन्नाटा छा जाता है। बड़े-बड़े राजा, शूरवीर और चक्रवर्ती सम्राट हार मान चुके हैं। राजा द्रुपद को चिंता सताने लगती है कि क्या उनकी अयोनिजा पुत्री द्रौपदी के भाग्य में आज कोई वर नहीं है? क्या पांचाल की राजकुमारी कुंवारी रह जाएगी? तभी ब्राह्मणों की भीड़ में से एक तेजस्वी, शांत और आत्मविश्वास से भरा युवक खड़ा होता है। यह कोई और नहीं, बल्कि ब्राह्मण के भेष में छद्म रूप धारण किए हुए तीसरे पांडव—धनुर्धर अर्जुन हैं। अर्जुन को आगे आता देख सभा में बैठे अभिमानी क्षत्रिय राजा और राजकुमार उनका उपहास करने लगते हैं। वे कहते हैं, "जिस शिव धनुष को हम जैसे शूरवीर तिल भर भी नहीं हिला सके, उसे एक भिक्षा मांगने वाला साधारण ब्राह्मण कैसे उठाएगा? यह ब्राह्मण पूरे क्षत्रिय समाज का अपमान कर रहा है।" लेकिन अर्जुन इन तानों की बिल्कुल परवाह नहीं करते। भगवान श्री कृष्ण, जो वहां उपस्थित हैं, अर्जुन को देखकर मुस्कुराते हैं; वे जानते हैं कि नियति आज क्या इतिहास रचने वाली है。 अर्जुन शांत मन से मंच पर जाते हैं। वे सबसे पहले भगवान शिव और अपने गुरु द्रोणाचार्य को मन ही मन प्रणाम करते हैं। इसके बाद वे अत्यंत सहजता से उस भारी-भरकम और दिव्य शिव धनुष को उठा लेते हैं, जिसे बड़े-बड़े राजा हिला भी नहीं सके थे। यह दृश्य देखकर पूरी सभा के होश उड़ जाते हैं। बिना किसी विशेष प्रयास के अर्जुन उस पर प्रत्यंचा (डोरी) चढ़ा देते हैं। इसके बाद आता है वह क्षण जिसका इंतजार पूरी सृष्टि कर रही थी। अर्जुन नीचे रखे खौलते हुए तेल के कड़ाह में देखते हैं। ऊपर एक विशाल चक्र तेजी से घूम रहा है, जिसके बीच में एक लकड़ी की मछली लटकी हुई है। अर्जुन को केवल तेल में मछली की परछाई देखकर उस घूमती हुई मछली की आंख को भेदना है। अर्जुन एकाग्र होते हैं, उनका पूरा ध्यान केवल मछली की आंख पर है (जैसा उन्होंने गुरु द्रोण को बचपन में दिखाया था)। वे एक अचूक बाण छोड़ते हैं, जो सीधा जाकर मछली की आंख को भेद देता है और मछली नीचे आ गिरती है。 पूरा दरबार आश्चर्य और सन्नाटे में डूब जाता है, और फिर क्षण भर में वहां हर्षोल्लास छा जाता है। ब्राह्मण खुशी से अपने वस्त्र हवा में उछालने लगते हैं, देवता पुष्प वर्षा करते हैं। द्रौपदी, जिनकी आंखों में एक चमक आ जाती है, आगे बढ़ती हैं और उस 'ब्राह्मण' (अर्जुन) के गले में वरमाला डाल देती हैं। लेकिन यह विजय शांति से पूरी नहीं होती। क्षत्रिय राजाओं (विशेषकर दुर्योधन, शल्य और कर्ण) का अहंकार इस बात को स्वीकार नहीं कर पाता कि एक 'भिक्षुक ब्राह्मण' ने उन्हें हरा दिया और राजकुमारी को जीत लिया। वे क्रोध में आकर अर्जुन और राजा द्रुपद पर हमला कर देते हैं। तब महाबली भीम एक विशाल पेड़ उखाड़कर अर्जुन की रक्षा के लिए खड़े हो जाते हैं। अर्जुन और भीम दोनों मिलकर उन अभिमानी राजाओं की सेना को धूल चटा देते हैं। कर्ण को अर्जुन के बाणों की गति देखकर संदेह होने लगता है कि ऐसा कौशल केवल परशुराम, द्रोण या अर्जुन के पास ही हो सकता है। यह एपिसोड अर्जुन के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर होने का सबसे बड़ा प्रमाण पेश करता है और द्रौपदी के जीवन में पांडवों के प्रवेश की नींव रखता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 11
Release Year
1988











