Mahabharat EP 14 - दैत्य शिल्पी पाण्डवों को लेकर पहुँचे खाण्डव वन के ख़ज़ाने तक | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 14 - दैत्य शिल्पी पाण्डवों को लेकर पहुँचे खाण्डव वन के ख़ज़ाने तक | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का चौदहवां (14वां) एपिसोड एक नई शुरुआत, घोर अन्याय के बाद संघर्ष और एक बंजर भूमि को स्वर्ग बनाने के संकल्प की कहानी है। विदुर के आमंत्रण पर जब पांडव माता कुंती और द्रौपदी के साथ वापस हस्तिनापुर लौटते हैं, तो प्रजा उनका भव्य स्वागत करती है। लेकिन राजमहल के भीतर कौरवों का षड्यंत्र अभी खत्म नहीं हुआ है। महाराज धृतराष्ट्र, शकुनि और दुर्योधन की चालों के प्रभाव में आकर, राज्य विभाजन का एक बहुत ही अन्यायपूर्ण निर्णय लेते हैं। वे समृद्ध और विकसित 'हस्तिनापुर' दुर्योधन को सौंप देते हैं और पांडवों के हिस्से में 'खांडवप्रस्थ' नाम का एक अत्यंत भयंकर, बंजर और खौफनाक जंगल दे देते हैं。 खांडवप्रस्थ कोई साधारण वन नहीं है; यह वह वन है जहां भयंकर नाग, दानव, राक्षस और विषैले जीव-जंतुओं का वास है। वहां न तो कोई खेती हो सकती है और न ही कोई इंसान रह सकता है। कौरवों का यह निर्णय पांडवों के लिए एक बहुत बड़ा अपमान है, लेकिन धर्मराज युधिष्ठिर अपने तात (धृतराष्ट्र) की आज्ञा को शिरोधार्य करते हैं और बिना किसी विरोध के खांडवप्रस्थ को स्वीकार कर लेते हैं। जब पांडव अपने नए 'राज्य' (खांडव वन) में पहुंचते हैं, तो वहां की वीरानगी और खौफनाक माहौल देखकर वे थोड़े निराश होते हैं। लेकिन उनके साथ उनके सबसे बड़े मार्गदर्शक और सखा भगवान श्री कृष्ण मौजूद हैं। श्री कृष्ण पांडवों का मनोबल बढ़ाते हैं और कहते हैं कि "कर्म और पुरुषार्थ से बंजर भूमि को भी स्वर्ग बनाया जा सकता है।" खांडव वन को रहने लायक बनाने के लिए उसे साफ करना आवश्यक है। इसी दौरान, अग्निदेव प्रकट होते हैं और अर्जुन से खांडव वन को भस्म करने की अनुमति मांगते हैं। अर्जुन और श्री कृष्ण अग्निदेव की सहायता करते हैं और देवराज इंद्र के विरोध के बावजूद खांडव वन को जलाकर साफ किया जाता है। इस आग के दौरान, एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना घटती है। उस वन में रहने वाला 'मयासुर' (Maya Danava), जो दैत्यों का सबसे महान और मायावी शिल्पी (Architect) है, आग में फंस जाता है। मयासुर अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा होता है, तब अर्जुन उसे अभयदान (जीवनदान) देते हैं और उसकी रक्षा करते हैं। अपनी जान बचाने के एहसान के बदले, मयासुर अर्जुन और श्री कृष्ण के चरणों में गिरकर कहता है कि वह उनका दास है और उनके लिए कुछ भी करने को तैयार है。 श्री कृष्ण मयासुर को आदेश देते हैं कि वह पांडवों के लिए एक ऐसा भव्य, जादुई और अलौकिक नगर व राजमहल बनाए, जिसकी कल्पना तीनों लोकों में किसी ने न की हो। मयासुर पांडवों को खांडव वन के उस रहस्यमयी हिस्से और खजाने तक ले जाता है, जहां उसने प्राचीन काल से अपार धन, दिव्य मणियां, जादुई जल-कुंड और मायावी संरचनाओं का रहस्य छिपा कर रखा था। मयासुर वादा करता है कि वह अपने मायावी शिल्प से इस बंजर जमीन पर एक ऐसा महल खड़ा करेगा जो स्वर्ग के देवताओं के महल (अमरावती) को भी मात दे देगा। यह एपिसोड पांडवों के कठिन संघर्ष और मयासुर की चमत्कारी कला के जरिए उनकी नई पहचान (इंद्रप्रस्थ) के जन्म की नींव रखता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 14
Release Year
1988












