Mahabharat EP 16 - युधिष्ठिर बने इंद्रप्रस्थ के राजा | महाभारत एक धर्म युद्ध

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Mahabharat EP 16 - युधिष्ठिर बने इंद्रप्रस्थ के राजा | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 16
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

महाभारत का सोलहवां (16वां) एपिसोड धर्म, न्याय और एक नए, गौरवशाली साम्राज्य की स्थापना का प्रतीक है—'इंद्रप्रस्थ में युधिष्ठिर का राज्याभिषेक'। मयासुर द्वारा निर्मित अलौकिक 'इंद्रप्रस्थ' नगरी अब पूरी तरह से बस चुकी है और पांडवों का सुशासन चारों ओर अपनी चमक बिखेर रहा है। इस नए साम्राज्य में न्याय सर्वोपरि है और प्रजा अत्यंत सुखी है। युधिष्ठिर को विधि-विधान के साथ इंद्रप्रस्थ का राजा घोषित किया जाता है। उनके राज्याभिषेक में बड़े-बड़े ऋषि-मुनि और भारतवर्ष के कई राजा शामिल होते हैं। पांडव अपनी मेहनत, सत्य और भगवान श्री कृष्ण के मार्गदर्शन से एक ऐसी सत्ता स्थापित करते हैं, जिसे हस्तिनापुर से भी अधिक सम्मान मिलने लगता है। इसी दौरान, एक दिन देवर्षि नारद मुनि आकाश मार्ग से इंद्रप्रस्थ की नई बनी 'मयसभा' (मायावी राजमहल) में पधारते हैं। नारद मुनि युधिष्ठिर को उनके पिता पांडु का एक संदेश देते हैं। वे बताते हैं कि महाराज पांडु स्वर्ग में तो हैं, परंतु उन्हें शांति तब तक नहीं मिलेगी जब तक उनका पुत्र 'राजसूय यज्ञ' (Rajasuya Yagya) संपन्न करके चक्रवर्ती सम्राट नहीं बन जाता। राजसूय यज्ञ एक ऐसा महायज्ञ है जिसे करने वाला राजा पूरे भारतवर्ष का एकछत्र सम्राट मान लिया जाता है, और सभी अन्य राजाओं को उसकी अधीनता स्वीकार करनी पड़ती है। नारद मुनि की यह बात सुनकर युधिष्ठिर इस पर विचार करते हैं और अपने अनुजों तथा श्री कृष्ण से सलाह लेते हैं। श्री कृष्ण इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं और कहते हैं कि युधिष्ठिर जैसा धर्मपरायण राजा ही इस पृथ्वी पर राजसूय यज्ञ करने का वास्तविक अधिकारी है। लेकिन श्री कृष्ण एक अत्यंत गंभीर बात भी बताते हैं—"हे धर्मराज! इस यज्ञ को पूर्ण करना इतना सरल नहीं है। भारतवर्ष में कई ऐसे अत्याचारी और क्रूर राजा हैं जो स्वेच्छा से आपकी अधीनता स्वीकार नहीं करेंगे। जब तक आप उन अधर्मियों को पराजित नहीं कर देते, तब तक यह महायज्ञ संपन्न नहीं हो सकता।" इधर हस्तिनापुर में, दुर्योधन और शकुनि को जब पता चलता है कि युधिष्ठिर राजसूय यज्ञ की तैयारी कर रहे हैं और चक्रवर्ती सम्राट बनने वाले हैं, तो वे ईर्ष्या की आग में जलकर राख होने लगते हैं। दुर्योधन को ऐसा महसूस होता है कि उसने जिस पांडवों को खत्म करने के लिए लाक्षागृह बनवाया था, वे मौत के मुंह से निकलकर आज उसके सिर के ताज बनने जा रहे हैं। यह एपिसोड एक ओर पांडवों के वैभव के चरम को दर्शाता है और दूसरी ओर उस राजनीतिक टकराव की नींव रखता है जो राजसूय यज्ञ के दौरान भयंकर रूप लेने वाला है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 16

Release Year

1988

Mahabharat EP 16 - युधिष्ठिर बने इंद्रप्रस्थ के राजा | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

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