Mahabharat EP 17 - श्री कृष्ण की जरासंध को मारने की योजना | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mahabharat EP 17 - श्री कृष्ण की जरासंध को मारने की योजना | महाभारत एक धर्म युद्ध

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Mahabharat EP 17 - श्री कृष्ण की जरासंध को मारने की योजना | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 17
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

महाभारत का सत्रहवां (17वां) एपिसोड राजसूय यज्ञ की सबसे बड़ी बाधा—मगध नरेश जरासंध—और उसे रास्ते से हटाने के लिए भगवान श्री कृष्ण की अत्यंत चतुर और कूटनीतिक योजना पर केंद्रित है। राजसूय यज्ञ के संकल्प के बाद, श्री कृष्ण युधिष्ठिर को समझाते हैं कि पूरे आर्यावर्त में केवल एक ऐसा राजा है जो सबसे अधिक बलवान, अत्याचारी और अजेय है—वह है मगध का शासक 'जरासंध'। जरासंध इतना क्रूर है कि उसने 86 छोटे राजाओं को बंदी बना रखा है और उन्हें यातनाएं दे रहा है। उसका संकल्प है कि वह 100 राजाओं को बंदी बनाकर भगवान शिव के समक्ष उनकी सामूहिक बलि देगा। जब तक यह महापापी जीवित है, तब तक युधिष्ठिर चक्रवर्ती सम्राट नहीं बन सकते। जरासंध को युद्ध के मैदान में अपनी सेनाओं के साथ हराना लगभग असंभव है, क्योंकि उसके पास अनगिनत अक्षौहिणी सेना है और उसे एक विशेष वरदान प्राप्त है। श्री कृष्ण समझाते हैं कि जरासंध का जन्म दो हिस्सों में हुआ था, जिन्हें 'जरा' नाम की एक राक्षसी ने आपस में जोड़कर एक कर दिया था। इसलिए, किसी भी साधारण अस्त्र या शस्त्र से उसके शरीर को काटकर मारा नहीं जा सकता, क्योंकि उसके शरीर के दोनों हिस्से कटने के बाद वापस आपस में जुड़ जाते हैं। श्री कृष्ण युधिष्ठिर को बताते हैं कि जरासंध का वध केवल एक आमने-सामने के मल्ल-युद्ध (Wrestling) में ही संभव है, और पूरे ब्रह्मांड में केवल महाबली भीम ही उसे इस कुश्ती में हरा सकते हैं। अपनी इस गुप्त योजना को अंजाम देने के लिए, श्री कृष्ण, भीम और अर्जुन अपने राजसी वस्त्र और अस्त्र-शस्त्र त्याग देते हैं। वे एक ऐसा रूप धारण करते हैं जिससे जरासंध उन्हें पहचान न सके। तीनों 'स्नातक ब्राह्मणों' (तपस्वियों) का भेष बनाकर मगध की राजधानी गिरिब्रज में प्रवेश करते हैं। जरासंध, जो खुद को एक बहुत बड़ा दानवीर और ब्राह्मणों का भक्त मानता है, का यह नियम है कि वह किसी भी ब्राह्मण को अपने द्वार से खाली हाथ नहीं जाने देता। तीनों 'ब्राह्मण' सीधे जरासंध के राजमहल में प्रवेश करते हैं। उनका तेज और उनके चलने का तरीका ब्राह्मणों जैसा नहीं, बल्कि क्षत्रियों जैसा होता है। जरासंध उन्हें देखकर थोड़ा संदेह में पड़ जाता है। श्री कृष्ण बहुत ही चालाकी से जरासंध के अहंकार को ललकारते हैं। यह एपिसोड श्री कृष्ण की उस अद्भुत कूटनीति (Diplomacy) और लीला को दर्शाता है, जहां वे बिना किसी सेना के, केवल अपने दिमाग और भीम के बाहुबल के भरोसे, भारतवर्ष के सबसे खूंखार राजा का अंत करने के लिए सीधे मौत के मुंह में घुस जाते हैं। दर्शकों के लिए यह योजना और भेष बदलने का दृश्य अत्यधिक रोमांचक और सस्पेंस से भरा होता है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 17

Release Year

1988

Mahabharat EP 17 - श्री कृष्ण की जरासंध को मारने की योजना | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

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