Mahabharat EP 18 - भीम ने किया जरासंध का वध | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का अठारहवां (18वां) एपिसोड एक भयंकर, ऐतिहासिक और रोंगटे खड़े कर देने वाले मल्ल-युद्ध (Wrestling Match) का गवाह बनता है—'भीम और जरासंध का युद्ध'। मगध के राजमहल में श्री कृष्ण, भीम और अर्जुन के साथ जरासंध का एक भयंकर वाकयुद्ध (Verbal Duel) होता है। जरासंध उनके क्षत्रिय जैसे कंधों और उनके हाव-भाव को देखकर समझ जाता है कि वे ब्राह्मण नहीं हैं। तब श्री कृष्ण अपना असली परिचय देते हैं और कहते हैं कि "हे जरासंध! तुमने 86 निर्दोष राजाओं को बंदी बनाकर घोर अधर्म किया है। हम तुम्हें द्वंद्व युद्ध (Combat) की चुनौती देने आए हैं।" जरासंध, जिसे अपने बल पर अपार घमंड है, हंसते हुए चुनौती स्वीकार कर लेता है। वह श्री कृष्ण और अर्जुन को अपने योग्य नहीं मानता, और युद्ध के लिए महाबली भीम को चुनता है। मगध की विशाल अखाड़ा-भूमि में भीम और जरासंध के बीच एक अत्यंत प्रलयंकारी और खून-खराबे से भरा मल्ल-युद्ध शुरू होता है। दोनों योद्धा एक-दूसरे पर घूंसे, लातें और मुक्के बरसाते हैं। एक-दूसरे को हवा में उछालकर जमीन पर पटकते हैं। यह कुश्ती एक या दो दिन नहीं, बल्कि लगातार चौदह दिन और चौदह रातों तक चलती है। दोनों में से कोई भी हार मानने को तैयार नहीं है। भीम कई बार जरासंध के शरीर को बीच से फाड़ कर दो टुकड़ों में कर देते हैं, लेकिन वरदान के कारण जरासंध के दोनों टुकड़े जमीन पर गिरते ही फिर से आपस में जुड़ जाते हैं और वह फिर से जिंदा होकर भीम पर हमला कर देता है। चौदहवें दिन, भीम बुरी तरह थक जाते हैं और उन्हें लगने लगता है कि जरासंध को मारना असंभव है। वे श्री कृष्ण की ओर असहाय नजरों से देखते हैं। तब श्री कृष्ण, जो स्वयं इस ब्रह्मांड के रचयिता हैं, एक बहुत ही चतुर और कूटनीतिक इशारा (Hint) करते हैं। श्री कृष्ण अपने हाथ में एक 'कुशा' (घास का तिनका) लेते हैं, उसे बीच से फाड़ते हैं, और उसके दोनों हिस्सों को उल्टी दिशाओं (Opposite Directions) में फेंक देते हैं। भीम तुरंत श्री कृष्ण के इस इशारे को समझ जाते हैं। अगले ही पल, भीम अपनी बची हुई पूरी ताकत इकट्ठा करते हैं, जरासंध को जमीन पर गिराते हैं, अपने एक पैर से जरासंध के पैर को दबाते हैं और अपने हाथों से उसके शरीर को बीच से चीर कर दो फाड़ कर देते हैं। इसके बाद, श्री कृष्ण के इशारे के अनुसार, भीम जरासंध के दाएं हिस्से को बाईं ओर और बाएं हिस्से को दाईं ओर (विपरीत दिशा में) फेंक देते हैं। इस बार, हिस्से उल्टे होने के कारण वे आपस में जुड़ नहीं पाते। जरासंध एक भयंकर चीख के साथ तड़प-तड़प कर वहीं मर जाता है। जरासंध का वध इस बात का प्रतीक है कि शक्ति चाहे कितनी भी अपार क्यों न हो, यदि वह अधर्म के साथ है, तो भगवान के ज्ञान और धर्म की रणनीति के सामने उसे एक न एक दिन घुटने टेकने ही पड़ते हैं।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 18
Release Year
1988












