Mahabharat EP 19 - श्री कृष्ण ने जरासंध के बंदी राजाओं को किया मुक्त | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 19 - श्री कृष्ण ने जरासंध के बंदी राजाओं को किया मुक्त | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का उन्नीसवां (19वां) एपिसोड अत्याचार के अंत, निर्दोषों की मुक्ति और भगवान श्री कृष्ण की असीम करुणा का एक बहुत ही सुंदर अध्याय है। जरासंध जैसे अजेय और क्रूर सम्राट का वध भीम के हाथों हो चुका है। जरासंध की मृत्यु का समाचार मिलते ही मगध में हाहाकार मच जाता है, लेकिन वहां की प्रजा और विशेष रूप से वे लोग राहत की सांस लेते हैं जो जरासंध के आतंक से परेशान थे। श्री कृष्ण, भीम और अर्जुन जरासंध के वध के बाद तुरंत मगध की उन अंधेरी और खौफनाक कालकोठरियों (Dungeons) की ओर जाते हैं, जहां 86 निर्दोष राजाओं को जानवरों की तरह जंजीरों में बांधकर रखा गया था। जब कालकोठरी के दरवाजे खुलते हैं और श्री कृष्ण उन बंदी राजाओं के सामने आते हैं, तो राजाओं की आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं। जरासंध ने इन राजाओं को भयानक यातनाएं दी थीं और उन्हें भगवान शिव की बलि चढ़ाने के लिए तैयार रखा था। श्री कृष्ण अपने हाथों से उन राजाओं की बेड़ियां खोलते हैं। सभी राजा भावविभोर होकर श्री कृष्ण, भीम और अर्जुन के चरणों में गिर पड़ते हैं और उन्हें अपना जीवनदाता मानते हैं। श्री कृष्ण उन राजाओं से कहते हैं कि वे अपने-अपने राज्यों में लौट जाएं और धर्म के मार्ग पर चलते हुए प्रजा की सेवा करें। कृतज्ञता के रूप में, वे सभी 86 राजा स्वेच्छा से इंद्रप्रस्थ के महाराज युधिष्ठिर की अधीनता स्वीकार कर लेते हैं और 'राजसूय यज्ञ' में अपना पूर्ण समर्थन देने का वचन देते हैं। इसके पश्चात, श्री कृष्ण कूटनीति का एक और उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हैं। वे मगध के राज्य को अपने कब्जे में नहीं लेते। इसके बजाय, वे जरासंध के पुत्र 'सहदेव' (जो स्वभाव से एक अच्छा और धर्मपरायण व्यक्ति है) को बुलाते हैं, उसे सांत्वना देते हैं और उसे विधि-विधान से मगध का नया राजा (सम्राट) घोषित कर देते हैं। यह कदम यह सिद्ध करता है कि श्री कृष्ण का उद्देश्य किसी का राज्य हड़पना नहीं था, बल्कि केवल अधर्म का नाश करना था। सहदेव भी युधिष्ठिर की अधीनता स्वीकार कर लेता है। जरासंध के वध और सभी राजाओं का समर्थन प्राप्त करने के बाद, श्री कृष्ण, भीम और अर्जुन अत्यंत शान और गौरव के साथ इंद्रप्रस्थ वापस लौटते हैं। जब युधिष्ठिर को यह समाचार मिलता है, तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता। वे श्री कृष्ण के चरणों में गिरकर उनका आभार व्यक्त करते हैं। जरासंध रूपी सबसे बड़े कांटे के निकल जाने के बाद, अब इंद्रप्रस्थ में भारतवर्ष के सबसे बड़े 'राजसूय महायज्ञ' की तैयारियां पूरे जोरों-शोरों से शुरू हो जाती हैं। यह एपिसोड युद्ध के बाद की शांति, क्षमा और एक नए युग की शुरुआत का बहुत ही सुखद अहसास देता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 19
Release Year
1988












