Mahabharat EP 22 - रुक्मिणी और अर्जुन का हुआ शिकार के दौरान हुआ मिलन | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 22 - रुक्मिणी और अर्जुन का हुआ शिकार के दौरान हुआ मिलन | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का बाईसवां (22वां) एपिसोड धर्मराज युधिष्ठिर के दरबार की एक कठोर मर्यादा, अर्जुन के वनवास और उनके द्वारिका आगमन की अत्यंत रोमांचक और भावनात्मक कहानी प्रस्तुत करता है। इंद्रप्रस्थ में सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा होता है। महर्षि नारद की सलाह पर पांडवों ने द्रौपदी के साथ समय बिताने के लिए एक कड़ा नियम बनाया था—जब कोई एक भाई द्रौपदी के कक्ष में हो, तो दूसरा भाई वहां प्रवेश नहीं कर सकता। यदि कोई भूल से भी प्रवेश कर जाए, तो उसे 12 वर्ष का कठोर वनवास (तपस्वी जीवन) भोगना पड़ेगा। एक दिन, कुछ लुटेरे एक गरीब ब्राह्मण की गायें चुरा लेते हैं। ब्राह्मण रोता हुआ अर्जुन के पास आता है। अर्जुन को ब्राह्मण की रक्षा के लिए अपने अस्त्र-शस्त्र चाहिए होते हैं, जो संयोगवश द्रौपदी के कक्ष में रखे होते हैं, जहाँ उस समय युधिष्ठिर मौजूद होते हैं। ब्राह्मण की रक्षा को अपना सर्वोच्च क्षत्रिय धर्म मानते हुए, अर्जुन मर्यादा तोड़कर कक्ष में प्रवेश करते हैं, अपने अस्त्र उठाते हैं और लुटेरों से गायें छुड़ा लाते हैं। परंतु, अपने ही बनाए नियम का पालन करते हुए, अर्जुन युधिष्ठिर और द्रौपदी के बहुत रोकने के बावजूद 12 वर्ष का वनवास स्वीकार कर लेते हैं। वनवास के दौरान अर्जुन एक तपस्वी (संन्यासी) का रूप धारण कर पूरे भारतवर्ष के विभिन्न तीर्थों की यात्रा करते हैं। वे नागकन्या उलूपी और मणिपुर की राजकुमारी चित्रांगदा से विवाह करते हैं। अपनी यात्रा के अंतिम चरण में अर्जुन पश्चिम में 'प्रभास तीर्थ' (द्वारिका के निकट) पहुँचते हैं। भगवान श्री कृष्ण, जो अपने परम सखा और भक्त अर्जुन के हर कदम को जानते हैं, उनसे मिलने वहां पहुँचते हैं। दोनों सखाओं (नर और नारायण) का यह मिलन अत्यंत भावुक और प्रेमपूर्ण होता है। श्री कृष्ण अर्जुन को द्वारिका आमंत्रित करते हैं। द्वारिका में अर्जुन का भव्य स्वागत होता है। इसी दौरान, श्री कृष्ण की पटरानी रुक्मिणी और अर्जुन का एक बहुत ही सम्मानजनक मिलन होता है। रुक्मिणी अर्जुन की वीरता और धर्मनिष्ठा से अत्यंत प्रभावित होती हैं। द्वारिका में रहते हुए, अर्जुन और श्री कृष्ण शिकार (Hunting) और वन-विहार के लिए जाते हैं। इस शिकार यात्रा के दौरान कुछ ऐसी परिस्थितियां बनती हैं जहाँ अर्जुन का शौर्य एक बार फिर द्वारिकावासियों के सामने उभर कर आता है। यह एपिसोड अर्जुन की कर्त्तव्यनिष्ठा, धर्म के प्रति उनके अटूट समर्पण और श्री कृष्ण के साथ उनके उस दैवीय और अलौकिक बंधन (Bond) को बहुत ही खूबसूरती से स्थापित करता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 22
Release Year
1988












