Mahabharat EP 24 - दुर्योधन और सुभद्रा का विवाह करने की शकुनि साज़िश | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 24 - दुर्योधन और सुभद्रा का विवाह करने की शकुनि साज़िश | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का चौबीसवां (24वां) एपिसोड एक बार फिर शकुनि की कुटिल राजनीति, सत्ता के लालच और एक प्रेमी हृदय की पीड़ा का एक अत्यंत ही तनावपूर्ण अध्याय है। द्वारिका में सुभद्रा और अर्जुन के बीच पनप रहे प्रेम की भनक जैसे ही हस्तिनापुर पहुँचती है, तो शकुनि का शातिर दिमाग तेजी से काम करने लगता है। शकुनि जानता है कि द्वारिका की 'नारायणी सेना' और भगवान श्री कृष्ण का समर्थन जिस पक्ष को मिलेगा, वह अजेय हो जाएगा। यदि सुभद्रा का विवाह अर्जुन से हो गया, तो द्वारिका और इंद्रप्रस्थ (पांडवों) के बीच एक अटूट राजनीतिक और पारिवारिक गठबंधन (Alliance) बन जाएगा, जो कौरवों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा होगा। इस खतरे को टालने के लिए शकुनि दुर्योधन को एक चाल सुझाता है। वह दुर्योधन से कहता है कि वह तुरंत द्वारिका जाए और बलराम जी के सामने सुभद्रा से विवाह का प्रस्ताव रखे। दुर्योधन अपने मामा शकुनि की बात मानकर कीमती उपहारों के साथ द्वारिका पहुँचता है। वह बलराम जी से मिलता है, जो पहले से ही दुर्योधन को अपना सबसे प्रिय शिष्य मानते हैं। दुर्योधन अत्यंत चालाकी से बलराम जी के सामने सुभद्रा का हाथ मांगता है। बलराम जी, जो राजनीतिक कूटनीति से ज्यादा भावनाओं और अपने शिष्य-प्रेम को महत्व देते हैं, इस प्रस्ताव को सुनकर अत्यंत प्रसन्न होते हैं। वे बिना श्री कृष्ण या सुभद्रा की इच्छा जाने, अपनी ओर से दुर्योधन को वचन दे देते हैं कि सुभद्रा का विवाह उसी (दुर्योधन) के साथ होगा। जब यह समाचार द्वारिका के राजमहल में पहुँचता है, तो सुभद्रा के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। वह अर्जुन से बेइंतहा प्रेम करती है और दुर्योधन जैसे अहंकारी व्यक्ति से विवाह करने की कल्पना मात्र से कांप उठती है। सुभद्रा रोते हुए अपनी व्यथा अपने सबसे प्रिय भाई श्री कृष्ण को सुनाती है। अर्जुन भी इस समाचार से अत्यंत निराश हो जाते हैं, क्योंकि वे बलराम जी का सम्मान करते हैं और उनसे सीधे विरोध नहीं कर सकते। श्री कृष्ण, जो सब कुछ पहले से जानते हैं, सुभद्रा को धैर्य बंधाते हैं। वे जानते हैं कि बलराम जी का यह निर्णय केवल एक भावुकता है जो भविष्य में धर्म के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है। लेकिन श्री कृष्ण अपने बड़े भाई का सीधा अपमान भी नहीं करना चाहते। इसलिए, वे एक ऐसी गुप्त और अचूक 'लीला' (योजना) रचने का विचार करते हैं, जिससे बलराम जी का वचन भी रह जाए और सुभद्रा-अर्जुन का प्रेम भी सफल हो। यह एपिसोड दर्शकों को एक गहरे सस्पेंस में छोड़ देता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 24
Release Year
1988












