Mahabharat EP 25 - श्री कृष्ण ने रची सुभद्रा और अर्जुन को मिलाने की लीला | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 25 - श्री कृष्ण ने रची सुभद्रा और अर्जुन को मिलाने की लीला | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का पच्चीसवां (25वां) एपिसोड भगवान श्री कृष्ण की उस अद्भुत कूटनीति, हास्यपूर्ण लीला और एक अत्यंत ही रोमांचक 'अपहरण' (Kidnapping) की दास्तान है, जिसने महाभारत के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ दिया। सुभद्रा और दुर्योधन के विवाह की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अर्जुन निराश होकर द्वारिका से वापस लौटने का विचार कर रहे हैं। तभी श्री कृष्ण अर्जुन के पास आते हैं और उन्हें एक बहुत ही क्रांतिकारी और क्षत्रिय धर्म के अनुकूल सलाह देते हैं। श्री कृष्ण कहते हैं, "हे सखा! क्षत्रिय प्रेम की भिक्षा नहीं मांगते; वे अपनी प्रेम की वस्तु को बलपूर्वक प्राप्त करते हैं। यदि तुम सुभद्रा से सच्चा प्रेम करते हो, तो तुम्हें उसका हरण (Abduction) कर लेना चाहिए।" अर्जुन इस बात से घबरा जाते हैं कि यदि उन्होंने सुभद्रा का हरण किया, तो दाऊ बलराम और पूरी द्वारिका की सेना उनके खिलाफ युद्ध छेड़ देगी। तब श्री कृष्ण अपनी सबसे बड़ी और चालाक कूटनीतिक चाल चलते हैं। श्री कृष्ण सुभद्रा को समझाते हैं कि जब अर्जुन रथ लेकर उन्हें भगाने आएं, तो रथ की लगाम (लगाम/सारथी का पद) अर्जुन नहीं, बल्कि स्वयं सुभद्रा संभालें। योजना के अनुसार, सुभद्रा जब मंदिर में पूजा करने जाती हैं, तो अर्जुन अपने रथ के साथ वहां पहुँच जाते हैं। सुभद्रा ख़ुशी-खुशी रथ में सवार हो जाती हैं, लेकिन श्री कृष्ण की योजना के अनुसार, वह खुद रथ के घोड़ों की लगाम पकड़ कर रथ हाँकने लगती हैं। जब यह खबर बलराम जी को मिलती है कि अर्जुन ने सुभद्रा का हरण कर लिया है, तो वे क्रोध से आगबबूला हो जाते हैं। वे अपना 'हल' (Hala) उठाते हैं और पूरी नारायणी सेना को अर्जुन पर आक्रमण करने का आदेश देते हैं। तभी श्री कृष्ण मुस्कुराते हुए बलराम जी के सामने आते हैं और उन्हें शांत करते हुए कहते हैं, "दाऊ! तनिक विचार कीजिए। हरण तो वह होता है जहाँ कोई पुरुष किसी स्त्री को बलपूर्वक ले जाए। लेकिन यहाँ तो सुभद्रा स्वयं रथ हाँक रही है और अर्जुन पीछे बैठे हैं। इसका तो यह अर्थ हुआ कि सुभद्रा ने ही अर्जुन का हरण कर लिया है!" श्री कृष्ण का यह अकाट्य तर्क सुनकर बलराम जी का सारा क्रोध आश्चर्य में बदल जाता है और फिर वे भी ठहाका मारकर हंस पड़ते हैं। उन्हें समझ आ जाता है कि सुभद्रा भी अर्जुन से प्रेम करती है और यह सब कृष्ण की ही रची हुई लीला है। अंततः, बलराम जी अपने छोटे भाई की इस चतुर नीति के सामने झुक जाते हैं। वे अर्जुन और सुभद्रा को वापस सम्मानपूर्वक द्वारिका बुलाते हैं और पूरे वैदिक विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ उनका विवाह संपन्न कराते हैं। इस प्रकार शकुनि और दुर्योधन की चाल धरी की धरी रह जाती है, और पांडवों को द्वारिका का सबसे बड़ा राजनीतिक और पारिवारिक समर्थन प्राप्त हो जाता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 25
Release Year
1988












