Mahabharat EP 31 - श्री कृष्ण ने अर्जुन से सुभद्रा का हरण करने को कहा | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 31 - श्री कृष्ण ने अर्जुन से सुभद्रा का हरण करने को कहा | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का इकतीसवां (31वां) एपिसोड धर्म, प्रेम और भगवान श्री कृष्ण की उस अद्भुत और विद्रोही कूटनीति का शानदार उदाहरण है, जिसने सामाजिक बंधनों और राजनीतिक स्वार्थों को चुनौती दी। द्वारिका के अंतापुर में सुभद्रा और अर्जुन अत्यंत गहरी निराशा और दुःख के सागर में डूबे हुए हैं, क्योंकि दाऊ बलराम ने सुभद्रा का विवाह हस्तिनापुर के युवराज दुर्योधन से तय कर दिया है। अर्जुन, जो अपने वनवास के नियमों और दाऊ बलराम के प्रति सम्मान के कारण विवश हैं, द्वारिका से भारी मन से विदा लेने का निर्णय करते हैं। वे अपने इष्टदेव और सखा श्री कृष्ण से अंतिम विदाई लेने जाते हैं। लेकिन श्री कृष्ण, जो स्वयं प्रेम और धर्म के रक्षक हैं, अर्जुन को हताश देखकर एक बहुत ही क्रांतिकारी उपदेश देते हैं। वे अर्जुन को उनके 'क्षत्रिय धर्म' का स्मरण कराते हैं। श्री कृष्ण कहते हैं, "हे पार्थ! एक क्षत्रिय प्रेम की भिक्षा नहीं मांगता। यदि तुम्हारा प्रेम सच्चा है और सुभद्रा भी तुम्हें ही अपना पति मानती है, तो तुम्हें राजनीति की वेदियों पर अपने प्रेम की बलि नहीं चढ़ने देनी चाहिए।" श्री कृष्ण अर्जुन को सुझाव देते हैं कि वे सुभद्रा का हरण (Abduction) कर लें। यह सुनकर अर्जुन चौंक जाते हैं, क्योंकि बलपूर्वक हरण करना द्वारिका के खिलाफ एक युद्ध की घोषणा होगी। तब श्री कृष्ण अपनी सबसे कुशाग्र और चतुर 'लीला' रचते हैं। वे अर्जुन को बताते हैं कि अपहरण का अर्थ होता है जब किसी स्त्री को उसकी इच्छा के विरुद्ध ले जाया जाए। लेकिन यदि सुभद्रा स्वयं अपनी इच्छा से तुम्हारे साथ जाए, तो इसे अपहरण कैसे कहा जा सकता है? श्री कृष्ण अर्जुन को एक अभेद्य योजना बताते हैं: जब अर्जुन अपना रथ लेकर सुभद्रा को ले जाने आएं, तो वे स्वयं रथ न चलाएं, बल्कि रथ की लगाम (Reins) सुभद्रा के हाथों में थमा दें। इस तरह पूरी दुनिया यही देखेगी कि सुभद्रा ने ही अर्जुन का हरण किया है। यह एपिसोड प्रेम की विजय के लिए रची गई एक अत्यंत ही रोमांचक और बौद्धिक योजना का ताना-बाना बुनता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 31
Release Year
1988












