Mahabharat EP 35 - द्रौपदी ने अपनी लाज बचाने के लिए लगाई सभा में गुहार | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 35 - द्रौपदी ने अपनी लाज बचाने के लिए लगाई सभा में गुहार | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का पैंतीसवां (35वां) एपिसोड भारतीय इतिहास और संस्कृति के सबसे पीड़ादायक, शर्मनाक लेकिन साथ ही सबसे बड़े ईश्वरीय चमत्कार का गवाह है—'द्रौपदी चीर-हरण और उनकी गुहार'। दुशासन द्रौपदी को बालों से घसीटते हुए हस्तिनापुर के उस विशाल दरबार में लाकर खड़ा कर देता है, जहाँ पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य, कुलगुरु कृपाचार्य और महाराज धृतराष्ट्र जैसे धर्म के बड़े-बड़े ठेकेदार सिर झुकाए बैठे हैं। द्रौपदी का रो-रोकर बुरा हाल है। वे सभा में मौजूद हर एक वरिष्ठ व्यक्ति से न्याय की गुहार लगाती हैं。 द्रौपदी एक अत्यंत तार्किक और धर्म-सम्मत प्रश्न पूछती हैं—"जब महाराज युधिष्ठिर पहले ही खुद को हारकर एक दास बन चुके थे, तो एक दास को अपनी पत्नी को दांव पर लगाने का क्या अधिकार था?" इस तीखे प्रश्न के सामने पितामह भीष्म जैसे परम ज्ञानी भी निरुत्तर हो जाते हैं और धर्म की सूक्ष्मता का बहाना बनाकर अपनी आँखें झुका लेते हैं। किसी भी पुरुष में इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह दुर्योधन के इस जघन्य अपराध को रोक सके। इसी बीच, सूर्यपुत्र कर्ण (जो द्रौपदी द्वारा स्वयंवर में किए गए अपने अपमान की आग में जल रहे थे) उठकर द्रौपदी को 'वेश्या' कहकर संबोधित करते हैं, क्योंकि उनके पांच पति हैं。 दुर्योधन अपनी सारी सीमाएं लांघते हुए अपनी जांघ (Thigh) नंगी करता है और द्रौपदी को उस पर आकर बैठने का आदेश देता है। यह देखकर भीम का खून खौल उठता है और वे उसी भरी सभा में प्रतिज्ञा करते हैं कि एक दिन वे अपनी गदा से दुर्योधन की इस जांघ को तोड़ देंगे। इसके बाद दुर्योधन दुशासन को आदेश देता है कि वह द्रौपदी को निर्वस्त्र कर दे (चीर-हरण करे)। जब दुशासन द्रौपदी की साड़ी खींचने लगता है और द्रौपदी को लगता है कि अब इस पृथ्वी पर कोई भी मनुष्य उनके सम्मान की रक्षा नहीं कर सकता, तो वे अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर आँखें बंद कर लेती हैं और अपने परम सखा, द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण को पुकारती हैं—"हे गोविंद! हे द्वारिकाधीश! अपनी सखी की लाज बचाओ!" तब भगवान श्री कृष्ण का वह अलौकिक चमत्कार होता है। दुशासन द्रौपदी की साड़ी खींचता जाता है, लेकिन साड़ी बढ़ती ही जाती है। साड़ी का ढेर लग जाता है, रंग-बिरंगे कपड़ों का अंबार लग जाता है। दुशासन खींचते-खींचते थक कर पसीने से लथपथ होकर गिर पड़ता है, लेकिन वह द्रौपदी को निर्वस्त्र नहीं कर पाता। यह एपिसोड यह संदेश देता है कि जब सारी दुनिया और सारे रिश्ते साथ छोड़ देते हैं, तब केवल ईश्वर ही अपने भक्त की पुकार सुनकर उसकी रक्षा के लिए दौड़े आते हैं।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 35
Release Year
1988












