Mahabharat EP 39 - उर्वशी ने अर्जुन को दिया नपुंसक होने का श्राप | महाभारत एक धर्म युद्ध

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Mahabharat EP 39 - उर्वशी ने अर्जुन को दिया नपुंसक होने का श्राप | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 39
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

महाभारत का छब्बीसवां (36वां) एपिसोड देवताओं के लोक (स्वर्ग) में घटित होने वाली एक अत्यंत रोचक, रहस्यमयी और भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण वरदान (श्राप के रूप में) की कहानी है। द्यूत क्रीड़ा में सब कुछ हारने के बाद पांडव अपने 12 वर्ष के वनवास और एक वर्ष के अज्ञातवास की कठिन चुनौती का सामना कर रहे हैं। इस संकट की घड़ी में, महर्षि वेदव्यास के मार्गदर्शन और बड़े भाई युधिष्ठिर की आज्ञा से, अर्जुन दिव्यास्त्र (जादुई और शक्तिशाली हथियार) प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करने हिमालय और फिर देवलोक (इंद्रलोक) जाते हैं। अर्जुन का उद्देश्य आगामी युद्ध के लिए खुद को और पांडव सेना को मजबूत करना है। इंद्रलोक में अर्जुन का भव्य स्वागत होता है। देवराज इंद्र अपने वीर पुत्र को देखकर अत्यंत प्रसन्न होते हैं और उन्हें स्वर्ग के सभी सुख-सुविधाएं प्रदान करते हैं। इसी दौरान, स्वर्ग की सबसे सुंदर और अप्सराओं की रानी—'उर्वशी'—अर्जुन के अलौकिक तेज, उनके पौरुष और उनकी सुंदरता पर मुग्ध हो जाती है। उर्वशी के मन में अर्जुन के प्रति कामवासना जागृत होती है। एक रात, उर्वशी सोलह श्रृंगार करके और कामुक वेश धारण करके अर्जुन के शयनकक्ष में पहुंचती है। वह अर्जुन के सामने अपने प्रेम और मिलन का प्रस्ताव रखती है。 परंतु, अर्जुन जो अपनी मर्यादा और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं, इस प्रस्ताव को सुनकर अत्यंत असहज हो जाते हैं। अर्जुन हाथ जोड़कर अपनी आंखें नीची कर लेते हैं और उर्वशी से कहते हैं, "हे देवी! आप कुरुवंश के सबसे महान पूर्वज राजा पुरुरवा की पत्नी रह चुकी हैं। इस नाते आप हमारे पूरे वंश की जननी और मेरी माता के समान हैं। मैं एक पुत्र की भांति आपके चरणों में नमन करता हूँ। कृपया अपने मन से यह अनुचित विचार निकाल दें।" अपनी सुंदरता और आकर्षण पर अहंकार करने वाली उर्वशी को अर्जुन का यह व्यवहार एक भयंकर अपमान लगता है। जिस अप्सरा के एक इशारे पर देवता भी अपना तप छोड़ देते थे, उसे एक साधारण मनुष्य (अर्जुन) ने ठुकरा दिया था। क्रोध और अपमान की आग में जलती हुई उर्वशी अपना आपा खो बैठती है और अर्जुन को एक अत्यंत भयानक श्राप दे देती है—"तुमने एक स्त्री के प्रेम का तिरस्कार किया है और एक नामर्द (नपुंसक) की तरह व्यवहार किया है। मैं तुम्हें श्राप देती हूँ कि तुम अपना पौरुष खो दोगे और आजीवन एक किन्नर (नपुंसक) बनकर स्त्रियों के बीच नाच-गाकर अपना जीवन व्यतीत करोगे।" यह श्राप सुनकर अर्जुन स्तब्ध रह जाते हैं, लेकिन वे धर्म के मार्ग से नहीं डिगते। जब यह बात देवराज इंद्र को पता चलती है, तो वे आते हैं और अर्जुन को सांत्वना देते हैं। इंद्र उर्वशी के श्राप को पूरी तरह समाप्त तो नहीं कर सकते, लेकिन वे इसके प्रभाव को कम कर देते हैं। इंद्र कहते हैं कि यह श्राप अर्जुन को आजीवन नहीं, बल्कि केवल 'एक वर्ष' तक भुगतना पड़ेगा, और अर्जुन अपनी इच्छानुसार उस एक वर्ष का चुनाव कर सकेंगे। यह घटना भविष्य की एक बहुत बड़ी योजना का हिस्सा बन जाती है। यही श्राप अर्जुन के लिए तब एक वरदान साबित होता है, जब पांडवों को अपना एक वर्ष का 'अज्ञातवास' (Incognito Exile) काटना होता है। उस समय अर्जुन इसी श्राप का उपयोग करके 'बृहन्नला' नाम का एक नपुंसक नृत्य-शिक्षक बनकर राजा विराट के महल में छिपकर रहते हैं। यह एपिसोड अर्जुन के चरित्र की महानता, उनके संयम और नियति के अद्भुत खेल को बहुत ही गहराई से प्रस्तुत करता है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 39

Release Year

1988

Mahabharat EP 39 - उर्वशी ने अर्जुन को दिया नपुंसक होने का श्राप | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

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