Mahabharat EP 40 - अर्जुन ने पाया महादेव से पाशुप्तास्त्र | महाभारत एक धर्म युद्ध

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Mahabharat EP 40 - अर्जुन ने पाया महादेव से पाशुप्तास्त्र | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 40
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

महाभारत का सैंतीसवां (37वां) एपिसोड भक्ति, तपस्या और भगवान शिव के उस असीम आशीर्वाद की कहानी है जिसने अर्जुन को ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक बना दिया। पांडवों के वनवास के दौरान, यह स्पष्ट हो जाता है कि कौरवों से उनका युद्ध अटल है, और उस महायुद्ध में जीतने के लिए साधारण हथियार पर्याप्त नहीं होंगे। इसलिए, अर्जुन भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनका सबसे प्रलयंकारी अस्त्र—'पाशुपतास्त्र'—प्राप्त करने के लिए हिमालय की बर्फीली चोटियों पर घोर तपस्या करने निकल पड़ते हैं。 अर्जुन एक पैर पर खड़े होकर, अन्न-जल त्याग कर और पूरी एकाग्रता के साथ 'ओम नमः शिवाय' का जाप करते हैं। उनकी तपस्या इतनी कठोर होती है कि उससे उत्पन्न हुई ऊर्जा से तीनों लोकों में कंपन होने लगता है। अर्जुन की इस असीम भक्ति की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव स्वयं एक 'किरात' (पहाड़ी शिकारी/भील) का रूप धारण करते हैं और माता पार्वती को एक भीलनी के रूप में अपने साथ लेकर अर्जुन के तपस्या स्थल की ओर प्रस्थान करते हैं。 उसी समय, दुर्योधन द्वारा भेजा गया 'मूक' (Mookasura) नाम का एक मायावी दानव अर्जुन की तपस्या भंग करने और उनका वध करने के लिए एक विशाल और खूंखार जंगली सूअर (Wild Boar) का रूप धारण कर अर्जुन की ओर तेजी से दौड़ता है। सूअर की भयंकर गर्जना सुनकर अर्जुन की समाधि टूट जाती है। अर्जुन अपना गांडीव धनुष उठाते हैं और उस सूअर पर एक अचूक बाण चलाते हैं। ठीक उसी क्षण, किरात के भेष में आए भगवान शिव भी उस सूअर पर अपना बाण छोड़ते हैं। दोनों के बाण एक साथ सूअर को लगते हैं और वह दानव अपने असली रूप में आकर मर जाता है。 इसके बाद अर्जुन और उस अनजान शिकारी (किरात) के बीच इस बात पर बहस शुरू हो जाती है कि उस सूअर को किसने मारा है। अर्जुन अपने क्षत्रिय अहंकार में कहते हैं कि यह उनका शिकार है, जबकि शिकारी उन पर व्यंग्य करता है। बात इतनी बढ़ जाती है कि दोनों के बीच एक भयंकर द्वंद्व युद्ध शुरू हो जाता है। अर्जुन अपने सबसे शक्तिशाली और मायावी बाणों की वर्षा शिकारी पर करते हैं, लेकिन शिकारी उन सभी बाणों को हंसते हुए नष्ट कर देता है। अंततः अर्जुन के तरकश के सारे तीर खत्म हो जाते हैं। फिर दोनों के बीच मल्ल युद्ध (कुश्ती) होता है, जिसमें वह शिकारी अर्जुन को आसानी से उठाकर जमीन पर पटक देता है。 अपनी इस बुरी हार से अर्जुन हताश हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि यह कोई साधारण इंसान नहीं हो सकता। अपनी शक्ति वापस पाने और भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिए, अर्जुन मिट्टी का एक शिवलिंग बनाते हैं और उस पर एक फूलों की माला अर्पित करते हैं। लेकिन वह माला चमत्कारिक रूप से उस शिकारी (किरात) के गले में जाकर गिरती है। यह देखते ही अर्जुन के ज्ञान चक्षु खुल जाते हैं और वे समझ जाते हैं कि यह शिकारी कोई और नहीं, बल्कि साक्षात देवाधिदेव महादेव हैं。 अर्जुन फूट-फूट कर रोते हुए भगवान शिव के चरणों में गिर पड़ते हैं और अपने अज्ञान तथा अहंकार के लिए क्षमा मांगते हैं। भगवान शिव और माता पार्वती अपने असली, दिव्य और प्रकाशमयी स्वरूप में प्रकट होते हैं। भगवान शिव अर्जुन की वीरता, निडरता और सच्ची भक्ति से अत्यंत प्रसन्न होते हैं। शिवजी कहते हैं कि अर्जुन 'नर' के अवतार हैं और आज उन्होंने अपनी परीक्षा पास कर ली है। महादेव अर्जुन को अपना अमोघ और प्रलयंकारी 'पाशुपतास्त्र' प्रदान करते हैं, जिसे केवल मन की शक्ति से चलाया जा सकता है और जिसका कोई काट नहीं है। यह एपिसोड अर्जुन की आध्यात्मिक यात्रा और उनकी अजेय शक्तियों के जागरण का एक अत्यंत ही भव्य और रोमांचक दृश्य प्रस्तुत करता है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 40

Release Year

1988

Mahabharat EP 40 - अर्जुन ने पाया महादेव से पाशुप्तास्त्र | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

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