Mahabharat EP 45 - दुर्योधन ने श्री कृष्ण को बनाना चाहा बंदी | महाभारत एक धर्म युद्ध

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Mahabharat EP 45 - दुर्योधन ने श्री कृष्ण को बनाना चाहा बंदी | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 45
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

महाभारत का बयालीसवां (42वां) एपिसोड पूरे महाकाव्य के सबसे नाटकीय, खौफनाक और अलौकिक (Supernatural) प्रसंगों में से एक है—'श्री कृष्ण का विश्वरूप दर्शन'। हस्तिनापुर की भरी राजसभा में जब दुर्योधन ने श्री कृष्ण के शांति प्रस्ताव (5 गांव देने की मांग) को ठुकरा दिया, तो सभा में भारी तनाव पैदा हो गया। श्री कृष्ण दुर्योधन को कठोर चेतावनी देते हैं कि उसका यह हठ पूरे कुरुवंश के विनाश का कारण बनेगा। श्री कृष्ण की इन सत्य और चुभने वाली बातों से दुर्योधन तिलमिला उठता है। उसके अहंकार को इतनी गहरी चोट लगती है कि वह एक ऐसा जघन्य और मूर्खतापूर्ण अपराध करने की ठान लेता है, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। दुर्योधन भरी सभा में अपने दुष्ट भाइयों (दुशासन आदि) और सैनिकों को आदेश देता है कि इस शांतिदूत (श्री कृष्ण) को जंजीरों में बांधकर बंदी बना लिया जाए। यह आदेश सुनते ही पूरी सभा में हाहाकार मच जाता है। पितामह भीष्म, गुरु द्रोण और महात्मा विदुर अपनी सीटों से उठ खड़े होते हैं और दुर्योधन को इस घोर पाप (एक दूत और वो भी साक्षात ईश्वर को बंदी बनाने) से रोकने की कोशिश करते हैं। विदुर दुर्योधन को धिक्कारते हुए कहते हैं कि जो आग को कपड़े में बांधने की कोशिश करता है, वह खुद ही भस्म हो जाता है। लेकिन दुर्योधन किसी की नहीं सुनता और सैनिक रस्सियां लेकर श्री कृष्ण की ओर बढ़ने लगते हैं। तभी भगवान श्री कृष्ण एक अत्यंत रहस्यमयी और प्रलयंकारी हंसी हंसते हैं। वे दुर्योधन से कहते हैं, "हे दुर्योधन! तू मुझे इन साधारण रस्सियों से बांधेगा? मैं अकेला नहीं हूँ, पूरा ब्रह्मांड मुझमें समाया हुआ है।" इसके बाद श्री कृष्ण सभा के बीचों-बीच अपना अत्यंत विशाल, प्रकाशमयी और अलौकिक 'विश्वरूप' (Universal Form) प्रकट करते हैं। उनके शरीर से करोड़ों सूर्यों के समान तेज निकलने लगता है। उनके भीतर ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सभी देवता, ग्रह, नक्षत्र और पूरी सृष्टि के दर्शन होने लगते हैं। उनके मुख से ज्वालाएं निकल रही हैं और सभी योद्धा उनके भीतर समाते हुए दिखाई देते हैं। इस भयंकर और ईश्वरीय तेज को देखकर सभा में मौजूद सभी लोगों की आंखें चौंधिया जाती हैं और वे डर के मारे जमीन पर गिर पड़ते हैं। अंधा धृतराष्ट्र श्री कृष्ण से प्रार्थना करता है कि वह जीवन में एक बार यह दिव्य रूप देखना चाहता है। श्री कृष्ण अपनी कृपा से धृतराष्ट्र को कुछ पलों के लिए दिव्य दृष्टि प्रदान करते हैं ताकि वह उनके दर्शन कर सके। दुर्योधन यह सब देखकर भयभीत तो होता है, लेकिन उसका अहंकार उसे इसे केवल एक 'जादू' या मायाजाल मानने पर विवश कर देता है। विश्वरूप समेटने के बाद, श्री कृष्ण घोषणा करते हैं कि अब शांति का समय समाप्त हो गया है और कुरुक्षेत्र में केवल तलवारें ही बात करेंगी। सभा से प्रस्थान करने से पहले, श्री कृष्ण अपनी बुआ (पांडवों की माता) कुंती से मिलने उनके कक्ष में जाते हैं। कुंती अत्यंत भावुक होकर रोने लगती हैं और अपने पुत्रों को संदेश भिजवाती हैं कि जिस क्षत्रिय धर्म के लिए एक क्षत्राणी अपने पुत्रों को जन्म देती है, अब उस धर्म (युद्ध) का समय आ गया है। यह एपिसोड ईश्वर की असीम शक्ति के प्रदर्शन और विनाश के शंखनाद का सबसे बड़ा उदाहरण है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 45

Release Year

1988

Mahabharat EP 45 - दुर्योधन ने श्री कृष्ण को बनाना चाहा बंदी | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

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