Mahabharat EP 51 - ऋषि वेदव्यास जी ने धृतराष्ट्र को युद्ध न ना करने के दी सलाह | महाभारत एक धर्म युद्ध

Mahabharat EP 51 - ऋषि वेदव्यास जी ने धृतराष्ट्र को युद्ध न ना करने के दी सलाह | महाभारत एक धर्म युद्ध

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Mahabharat EP 51 - ऋषि वेदव्यास जी ने धृतराष्ट्र को युद्ध न ना करने के दी सलाह | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 51
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

महाभारत का अड़तालीसवां (48वां) एपिसोड हस्तिनापुर के राजमहल में बैठे एक अंधे पिता की विवशता, महर्षि वेदव्यास की चेतावनी और 'संजय की दिव्य दृष्टि' के उस ऐतिहासिक वरदान की कथा है। युद्ध आरंभ होने में अब कुछ ही समय शेष है। महर्षि वेदव्यास, जो कुरुवंश के पितामह और रचयिता हैं, महाराज धृतराष्ट्र के पास आते हैं। व्यास जी धृतराष्ट्र को प्रकृति में हो रहे भयंकर अपशकुनों (Bad Omens) के बारे में बताते हैं—"हे राजन! आसमान से उल्कापिंड गिर रहे हैं, नदियां उल्टी बह रही हैं और पक्षी भयंकर शोर कर रहे हैं। ये सब इस बात का संकेत हैं कि कुरुवंश का सर्वनाश होने वाला है। अभी भी समय है, अपने पुत्र दुर्योधन को रोक लो।" लेकिन धृतराष्ट्र, जो मोह में पूरी तरह से अंधे हो चुके हैं, अपनी विवशता प्रकट करते हुए कहते हैं कि दुर्योधन उनके नियंत्रण से बाहर है। धृतराष्ट्र की इस मजबूरी को देखकर महर्षि वेदव्यास अत्यंत दुखी होते हैं। वे धृतराष्ट्र के सामने एक प्रस्ताव रखते हैं—"यदि तुम इस महायुद्ध को अपनी आंखों से देखना चाहते हो, तो मैं तुम्हें 'दिव्य दृष्टि' (Divine Vision) प्रदान कर सकता हूँ।" धृतराष्ट्र, जो जन्म से अंधे हैं, इस प्रस्ताव को सुनकर कांप उठते हैं। वे कहते हैं, "हे महर्षि! मैंने जीवन भर कुछ नहीं देखा, अब अपने ही बेटों और अपनों को कटते-मरते हुए मैं अपनी आंखों से नहीं देखना चाहता। मुझे यह दृष्टि नहीं चाहिए।" परंतु धृतराष्ट्र यह भी चाहते हैं कि उन्हें युद्ध के मैदान की पल-पल की खबर मिलती रहे। तब महर्षि वेदव्यास धृतराष्ट्र के सारथी और सबसे विश्वस्त मंत्री 'संजय' को वह अलौकिक 'दिव्य दृष्टि' का वरदान देते हैं। व्यास जी कहते हैं कि संजय राजमहल में धृतराष्ट्र के पास बैठकर भी कुरुक्षेत्र के मैदान में हो रही हर छोटी-बड़ी घटना को अपनी आंखों से देख सकेगा, योद्धाओं के मन के विचार जान सकेगा और यहां तक कि भगवान के दिव्य रूप के दर्शन भी कर सकेगा। यह एपिसोड संजय के उस ऐतिहासिक पद (Narrator) की नींव रखता है, जिसके माध्यम से 'श्रीमद्भगवद्गीता' और पूरा महाभारत का युद्ध दुनिया के सामने आने वाला है। धृतराष्ट्र का मानसिक अंधापन और उनका डर इस एपिसोड का सबसे मजबूत और भावुक पहलू है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 51

Release Year

1988

Mahabharat EP 51 - ऋषि वेदव्यास जी ने धृतराष्ट्र को युद्ध न ना करने के दी सलाह | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

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