Mahabharat EP 53 - महाभारत के युद्ध का संजय ने दिया धृतराष्ट्र को वर्णन | महाभारत एक धर्म युद्ध

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Mahabharat EP 53 - महाभारत के युद्ध का संजय ने दिया धृतराष्ट्र को वर्णन | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 53
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

महाभारत का पचासवां (50वां) एपिसोड 'श्रीमद्भगवद्गीता' की पृष्ठभूमि के निर्माण, संजय के ऐतिहासिक वर्णन और धर्मराज युधिष्ठिर की उस अद्भुत विनम्रता का दृश्य है, जिसने युद्ध से पहले ही कौरवों की आधी हार तय कर दी थी। हस्तिनापुर के राजमहल में बैठे संजय अपनी 'दिव्य दृष्टि' से कुरुक्षेत्र का आँखों देखा हाल महाराज धृतराष्ट्र को सुनाना शुरू करते हैं—"धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः..." (हे राजन! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे और पांडु के पुत्रों ने क्या किया?)। संजय कौरवों और पांडवों की सेनाओं की भव्य व्यूह रचनाओं (Formations) का अत्यंत सजीव वर्णन करते हैं। कौरव सेना का आकार समुद्र के समान विशाल है, जिसका नेतृत्व पितामह भीष्म कर रहे हैं। तभी रणभूमि में एक ऐसा दृश्य घटित होता है जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। युद्ध शुरू होने के लिए नगाड़े बजने ही वाले हैं, कि अचानक धर्मराज युधिष्ठिर अपने रथ से नीचे उतर जाते हैं। वे अपना कवच, तलवार और मुकुट उतार देते हैं और नंगे पैर, निहत्थे होकर पैदल ही कौरव सेना की ओर बढ़ने लगते हैं। यह देखकर दुर्योधन और कौरव अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं; उन्हें लगता है कि युधिष्ठिर डर गए हैं और युद्ध से पहले ही आत्मसमर्पण (Surrender) करने आ रहे हैं। पांडव भी आश्चर्य में पड़ जाते हैं, लेकिन श्री कृष्ण मुस्कुराते रहते हैं। युधिष्ठिर सीधे शत्रु पक्ष में खड़े पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य, कुलगुरु कृपाचार्य और अपने मामा शल्य के पास जाते हैं और उनके चरण स्पर्श करते हैं। युधिष्ठिर अत्यंत विनम्रता से उनसे कहते हैं, "हे गुरुजनों! मुझे आपके विरुद्ध युद्ध करने की आज्ञा और इस धर्मयुद्ध में विजय होने का आशीर्वाद दीजिए।" युधिष्ठिर की इस असीम विनम्रता और धर्म के पालन को देखकर भीष्म और द्रोणाचार्य अत्यंत गदगद हो जाते हैं। वे युधिष्ठिर को "विजयी भव" (विजयी हो) का आशीर्वाद देते हैं। गुरु द्रोण कहते हैं कि जो मनुष्य युद्ध से पहले अपने गुरुओं का सम्मान करता है, उसकी जीत निश्चित है। गुरुजनों के इस आशीर्वाद को सुनकर दुर्योधन हताश हो जाता है, क्योंकि उसे समझ आ जाता है कि उसके अपने ही सेनापति मन से पांडवों की जीत चाहते हैं। यह एपिसोड बिना कोई हथियार उठाए लड़ी गई एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत (Psychological Victory) का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 53

Release Year

1988

Mahabharat EP 53 - महाभारत के युद्ध का संजय ने दिया धृतराष्ट्र को वर्णन | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

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