Mahabharat EP 56 - अधर्मी का विनाश | श्री कृष्ण विराट रूप | महाभारत युद्ध | महाभारत एक धर्म युद्ध

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Mahabharat EP 56 - अधर्मी का विनाश | श्री कृष्ण विराट रूप | महाभारत युद्ध | महाभारत एक धर्म युद्ध

9.5
Episode 56
1988
HDMythologyDramaHistory

Description

महाभारत का तिरपनवां (53वां) एपिसोड भारतीय महाकाव्य और टेलीविजन के इतिहास का सबसे भव्य, अलौकिक और रोंगटे खड़े कर देने वाला प्रसंग है—'श्री कृष्ण का विराट रूप दर्शन' (Vishwaroop Darshan)। गीता का ज्ञान प्राप्त करते-करते अर्जुन के मन का सारा मोह तो नष्ट हो जाता है, परंतु अब उनके भीतर यह जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि वे श्री कृष्ण के उस साक्षात परब्रह्म और ईश्वरीय स्वरूप को अपनी आंखों से देखें, जिसके बारे में श्री कृष्ण बात कर रहे हैं। अर्जुन हाथ जोड़कर श्री कृष्ण से प्रार्थना करते हैं—"हे योगेश्वर! यदि आप समझते हैं कि मैं आपके उस अविनाशी और विश्वरूप को देखने के योग्य हूँ, तो कृपया मुझे अपने उन साक्षात दर्शनों से कृतार्थ करें।" श्री कृष्ण अर्जुन की इस पुकार को स्वीकार करते हैं। परंतु वे बताते हैं कि इन साधारण भौतिक आंखों (Physical Eyes) से कोई भी मनुष्य ईश्वर के उस अनंत रूप को नहीं देख सकता। इसलिए, श्री कृष्ण अर्जुन को 'दिव्य दृष्टि' (Divine Vision) प्रदान करते हैं। जैसे ही अर्जुन को दिव्य दृष्टि मिलती है, रणभूमि में एक ऐसा चमत्कार होता है जिसे देखकर अर्जुन की आंखें फटी रह जाती हैं और वे कांपने लगते हैं। श्री कृष्ण अपना अत्यंत विशाल, प्रकाशमयी और प्रलयंकारी 'विराट रूप' प्रकट करते हैं। इस विराट रूप में हजारों मुख, हजारों आंखें, हजारों भुजाएं और अनगिनत अस्त्र-शस्त्र दिखाई देते हैं। उनके शरीर से करोड़ों सूर्यों के समान तेज निकल रहा है। अर्जुन देखते हैं कि ब्रह्मा, शिव, सभी देवता, ग्रह, नक्षत्र, और पूरी सृष्टि श्री कृष्ण के भीतर ही समाई हुई है। सबसे डरावना दृश्य वह होता है जब अर्जुन देखते हैं कि कौरव सेना के सभी बड़े महारथी—भीष्म, द्रोण, कर्ण और दुर्योधन—तेजी से श्री कृष्ण के भयानक दांतों और प्रज्ज्वलित मुख (Mouth of Destruction) में समाते जा रहे हैं और भस्म हो रहे हैं। श्री कृष्ण गरजते हुए कहते हैं—"कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो..." (मैं लोकों का नाश करने वाला महाकाल हूँ! तुम्हारे युद्ध किए बिना भी ये सभी योद्धा मारे जाएंगे। मैंने इन्हें पहले ही मार दिया है, तुम तो केवल 'निमित्त मात्र' (Instrument) हो!)। यह देखकर अर्जुन का सारा अहंकार और डर खत्म हो जाता है। वे समझ जाते हैं कि जन्म और मृत्यु ईश्वर के हाथ में है। अर्जुन श्री कृष्ण के चरणों में गिर पड़ते हैं और प्रार्थना करते हैं कि वे वापस अपने सौम्य (चतुर्भुज और फिर मनुष्य) रूप में आ जाएं। इस एपिसोड में विजुअल इफेक्ट्स और संवादों का वह स्तर है जो दर्शकों को साक्षात ईश्वर की उपस्थिति का अहसास कराता है।

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Movie Details

Language

Hindi

Category

mahabharat

Duration

Episode 56

Release Year

1988

Mahabharat EP 56 - अधर्मी का विनाश | श्री कृष्ण विराट रूप | महाभारत युद्ध | महाभारत एक धर्म युद्ध
HD
9.5

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