Mahabharat EP 57 - महाभारत युद्ध प्रारंभ | मोक्ष का रास्ता | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 57 - महाभारत युद्ध प्रारंभ | मोक्ष का रास्ता | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का चौवनवां (54वां) एपिसोड गीता के ज्ञान की पूर्णता, अर्जुन के समर्पण और महाविनाशकारी 'महाभारत युद्ध के आरंभ' की शंखध्वनि का एक अत्यंत ही तनावपूर्ण और ऐतिहासिक अध्याय है। श्री कृष्ण के विराट रूप के दर्शन करने और यह जानने के बाद कि इस युद्ध का परिणाम पहले से ही ईश्वर द्वारा तय किया जा चुका है, अर्जुन के भीतर का अज्ञान, मोह और कायरता पूरी तरह से भस्म हो जाती है। श्री कृष्ण अपना अंतिम उपदेश देते हैं—"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज" (सभी धर्मों और आश्रयों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा)। अर्जुन पूरे आत्मविश्वास के साथ हाथ जोड़कर कहते हैं—"नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा... करिष्ये वचनं तव" (हे अच्युत! मेरा मोह नष्ट हो गया है, मुझे स्मृति प्राप्त हो गई है, अब मैं आपकी आज्ञा का पालन करूंगा)। यह कहते ही अर्जुन अपना अजेय धनुष 'गांडीव' उठा लेते हैं। इसके बाद दोनों सेनाओं की ओर से युद्ध की औपचारिक घोषणा की जाती है। भीष्म पितामह अपने विशाल शंख की गर्जना करते हैं। इसके उत्तर में भगवान श्री कृष्ण अपना 'पांचजन्य' (Panchajanya) और अर्जुन अपना 'देवदत्त' शंख बजाते हैं। शंखों की इस प्रलयंकारी ध्वनि से कुरुक्षेत्र की धरती कांप उठती है और कौरव सेना के हृदयों में खौफ पैदा हो जाता है。 महाभारत का युद्ध अंततः प्रारंभ हो जाता है। पहले दिन का युद्ध अत्यंत भयंकर और रक्तपात से भरा होता है। दोनों सेनाएं एक-दूसरे पर टूट पड़ती हैं। हाथी हाथियों से, रथ रथों से और पैदल सैनिक पैदल सैनिकों से भिड़ जाते हैं। कौरवों के प्रधान सेनापति गंगापुत्र भीष्म अपने तीरों से पांडव सेना में हाहाकार मचा देते हैं। भीष्म का पराक्रम इतना असीम है कि कोई भी पांडव योद्धा उनके सामने टिक नहीं पाता। पहले दिन के युद्ध में कौरवों का पलड़ा भारी रहता है, जिससे युधिष्ठिर और अन्य पांडव अत्यंत चिंतित हो उठते हैं। यह एपिसोड युद्ध की विभीषिका, मोक्ष के रास्ते (अपना कर्म करने) और धर्म-संस्थापना के लिए शुरू हुए इस रक्तपात को बहुत ही भव्यता और गंभीरता के साथ पर्दे पर उतारता है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 57
Release Year
1988












