Mahabharat EP 58 - उत्तर की वीरगति | अर्जुन और भीष्म पितामह के बीच युद्ध | महाभारत एक धर्म युद्ध
Mahabharat EP 58 - उत्तर की वीरगति | अर्जुन और भीष्म पितामह के बीच युद्ध | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का पचपनवां (55वां) एपिसोड महाभारत युद्ध के शुरुआती दिनों के खौफनाक खून-खराबे, एक बहुत बड़े और दुखद बलिदान (उत्तर की वीरगति) और पितामह भीष्म के उस प्रलयंकारी रूप को प्रस्तुत करता है, जिसने पांडवों की सेना को तिनके की तरह उड़ाना शुरू कर दिया था। युद्ध पूरी भयंकरता के साथ लड़ा जा रहा है। कुरुक्षेत्र की भूमि शवों, टूटे हुए रथों और घायल हाथियों से पट चुकी है। इसी बीच, राजा विराट का युवा और वीर पुत्र 'राजकुमार उत्तर' अपने हाथी पर सवार होकर मद्र नरेश शल्य (नकुल-सहदेव के मामा, जो कौरवों की ओर से लड़ रहे हैं) के साथ एक भयंकर द्वंद्व युद्ध करता है। राजकुमार उत्तर अत्यंत पराक्रम के साथ लड़ते हैं, लेकिन मद्र नरेश शल्य एक अत्यंत शक्तिशाली और अनुभवी योद्धा हैं। शल्य एक भयंकर और अमोघ भाला (Spear) राजकुमार उत्तर की छाती पर पूरी ताकत से फेंकते हैं। भाला सीधे उत्तर के सीने को चीर देता है और वह युवा योद्धा वीरगति को प्राप्त होकर जमीन पर गिर पड़ता है। जब यह समाचार राजा विराट और पांडवों को मिलता है, तो उनके शिविर में हाहाकार मच जाता है। यह महाभारत युद्ध में पांडवों के पक्ष से किसी प्रमुख योद्धा की पहली बड़ी शहादत है, जो यह स्पष्ट कर देती है कि इस युद्ध में कोई भी सुरक्षित नहीं है। दूसरी ओर, कौरवों के सेनापति पितामह भीष्म ने अपनी प्रतिज्ञा (प्रतिदिन 10 हजार सैनिकों का वध करने की) को पूरा करने के लिए पांडव सेना पर साक्षात मौत बनकर प्रहार करना शुरू कर दिया है। भीष्म के बाणों की गति इतनी तेज है कि वे एक ही समय में सभी दिशाओं में मार करते हुए प्रतीत होते हैं। पांडव सेना में भगदड़ मच जाती है। इस विनाश को रोकने के लिए अर्जुन अपने रथ पर सवार होकर सीधे पितामह भीष्म के सामने आते हैं। अर्जुन और भीष्म के बीच एक भयंकर युद्ध शुरू होता है। लेकिन यहाँ एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक समस्या उत्पन्न होती है। अर्जुन, जिनके हृदय में अपने पितामह (दादा) के लिए अपार सम्मान और प्रेम है, भीष्म पर पूरी ताकत और क्रूरता के साथ प्रहार नहीं कर पा रहे हैं। अर्जुन के बाणों में वह तीखापन नहीं है जो होना चाहिए। श्री कृष्ण, जो अर्जुन के सारथी हैं, यह देखकर अत्यंत क्रोधित और विचलित हो उठते हैं। श्री कृष्ण जानते हैं कि यदि अर्जुन इसी तरह भावना में बहकर कमजोर युद्ध लड़ते रहे, तो भीष्म पूरी पांडव सेना का सर्वनाश कर देंगे। यह एपिसोड पारिवारिक रिश्तों की उलझन, युद्ध की निर्दयता और श्री कृष्ण की उस बढ़ती हुई निराशा को बहुत ही सजीव तरीके से दर्शाता है, जो अंततः श्री कृष्ण को अपनी प्रतिज्ञा तोड़ने पर विवश करने वाली है।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 58
Release Year
1988












