Mahabharat EP 85 - पितामह भीष्म की बाणों की शैया | महाभारत एक धर्म युद्ध
Description
महाभारत का बयासीवां (82वां) एपिसोड उस महान गंगापुत्र के पतन और उनकी अद्वितीय 'बाणों की शैया' (Bed of Arrows) का अत्यंत ही मार्मिक चित्रण है। अर्जुन के अनगिनत बाणों से बिंधे हुए भीष्म पितामह रथ से नीचे गिर पड़ते हैं। परंतु उनके शरीर में इतने बाण लगे होते हैं कि उनका शरीर जमीन को नहीं छूता, बल्कि तीरों की शैया पर ही हवा में टिका रहता है। भीष्म को 'इच्छा मृत्यु' का वरदान प्राप्त था, इसलिए वे अपने प्राण नहीं त्यागते। वे सूर्य के 'उत्तरायण' होने की प्रतीक्षा करने का निर्णय लेते हैं। कौरव और पांडव, दोनों सेनाएं युद्ध रोककर अपने पितामह के सम्मान में उनके चारों ओर खड़ी हो जाती हैं। भीष्म अर्जुन से पीने के लिए जल मांगते हैं, और अर्जुन अपना बाण जमीन में मारकर पाताल से सीधे गंगा की जलधारा निकाल कर पितामह की प्यास बुझाते हैं।
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Movie Details
Language
Hindi
Category
mahabharat
Duration
Episode 85
Release Year
1988












